बजट 2019: छलावे और खोखले चुनावी वादों का बजट

देश के मजदूर आंदोलन द्वारा मोदी सरकार के शासन में हाल की 8-9 जनवरी की हड़ताल समेत तीन देशव्यापी हड़तालों और कई आंदोलनों के माध्यम से उठाई गई 12-सूत्री मांगों को इस सरकार ने अपने अंतिम बजट में भी नजरअंदाज कर दिया है.

बजट की तीन बड़ी घोषणाओं में शामिल असंगठित मजदूरों के लिये (जो कि 18 से 29 वर्ष के होने चाहिये) 60 साल की आयु के बाद प्रतिमाह 3000रू. पेंशन देना है जिसमें इन मजदूरों को अगले 30-31 साल तक प्रतिमाह 100रू. यानि हर साल 1200रू. देना होगा. साफ है कि प्रधानमंत्री के नाम पर रखी और घोषित यह पेंशन योजना एक छलावा है और इन मजदूरों की, जीने लायक भी नहीं, खून पसीने की कमाई पर डाका डालना है. इस बजट में मजदूरों के लिये इस भ्रामक घोषणा के अलावा कुछ और नहीं है. साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा पोषित योजनाओं आंगनबाड़ी, आशा, मिड-डे मील आदि को इस बजट में और ज्यादा कमजोर किया गया है. मिड-डे मील कर्मियों के मानदेय को बढ़ाने संबंधी कोई घोषणा भी इस बजट में नहीं की गई है, जबकि बिहार (जहां पिछले करीब एक माह से इन कर्मियों की हड़ताल चल रही है) समेत देशभर के मिड-डे मील कर्मी इस बात पर रोष व्यक्त कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री ने करीब दो माह पूर्व स्कीम कर्मियों के मानदेय बढ़ाने की अपनी घोषणा, जो हालांकि भ्रामक थी, में मिड-डे मील कर्मियों को जगह भी नहीं दी थी.

पिछले 45 वर्षों में अपने चरम पर पहुंच चुकी बेरोजगारी को जहां दूर-दूर तक इस बजट में संबोधित नहीं किया गया और सामाजिक कल्याण में लगातार व्यय घटाया गया है, वहीं ठीक उलटे बेशर्मी से देश के विकास का ही ढिंढोरा पीटा गया है.

सरकार रक्षा बजट को बढ़ाने की बात कर रही है, लेकिन यह ग्रामीण विकास, समाज कल्याण और तमाम केन्द्रीय योजनाओं में आवंटन में कमी करके (जो 2018-19 में क्रमशः- 5.5, 1.89 और 12.41 प्रतिशत था, अब 2019-20 में इसे घटा कर 4.99, 1.77 और 11.77 प्रतिशत) कर दिया गया है.

यह बजट घोर कर्ज संकट में फंसे किसानों के साथ क्रूर मजाक है जो एक किसान परिवार के एक व्यक्ति को 3रू. प्रतिदिन का आय सहयोग देता है और बटाईदारों, भूमिहीन किसानों और खेत मजदूरों को आय सहयोग देने के बारे में चुप है.  

रोजी-रोटी और अधिकारों का विनाश करने वाली मोदी सरकार के चुनाव की पूर्व वेला में आये इस बजट का करारा जवाब मेहनतकश अवाम को आने वाले चुनाव में देना होगा और कामगार-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी मौजूदा आर्थिक नीतियों को उलटने तक अपना संघर्ष जारी रखना होगा.

वर्षः 13
अंकः 11