रिपोर्ट

मोदी राज में चरम पर पहुंची असमानता

मोदी राज में नौ अमीरों ने देश की आबादी के पास मौजूद कुल संपत्ति के बराबर अपने खजाने भर लिये हैं. पिछले साल कॉरपोरेट घरानों की आमदनी में रोजाना 2200 करोड रूपये का इजाफा हुआ. देश के सबसे अमीर मुकेश अंबानी, अकेले ने ही तीन महीने में 10 हजार करोड़ रूपये से अधिक का मुनाफा कमा लिया.

पुरानी पेंशन बचाओ दिवस

सिटिजंस ब्रदरहुड, इलाहाबाद द्वारा 20 दिसंबर 2018 को शिक्षा निदेशालय गेट के समीप ‘पुरानी पेंशन बचाओ दिवस’ सम्मेलन आयोजित किया गया. इसके मुख्य वक्ता संतोष कुमार रॉय, राष्ट्रीय सचिव ऐक्टू, अध्यक्ष डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर, दिल्ली थे.  सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने डी.एस. नाकडा बनाम भारत संघ में, 17 दिसम्बर 1982 के अपने ऐतिहासिक निर्णय में यह माना था कि पेंशन कोई खैरात नही है, बल्कि यह प्रत्येक कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है.

बैंकिंग सेक्टर और मोदी सरकार

बैंकिंग सेक्टर में निजीकरण को बढ़ावा देने और कर्ज हड़पने वालों को उबारने के लिए ‘जन धन योजना’ का इस्तेमाल करने की कहानी सौरभ नरूका

भीड़-हिंसा के ‘गुजरात मॉडल’ का ताजातरीन निशाना हैं प्रवासी मजदूर

पिछले महीने के शुरू में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के हजारों प्रवासी मजदूरों को जहर भरे ढंग से ‘बाहरी लोग’ कहकर निशाना बनाया गया और उन पर बर्बरतापूर्ण हमले चलाये गये. 28 सितम्बर 2018 को गुजरात के सबरकांठा जिले में एक नाबालिग लड़की पर तथाकथित बलात्कार के आरोप में बिहार से आये एक प्रवासी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, उसके बाद से ही प्रवासी लोगों को निशाना बनाकर लाठियों और पत्थरों से पीटकर जख्मी किया गया और सोशल मीडिया में नफरत भरे संदेश प्रसारित किए गये.

भूखा भारत

11 अक्तूबर को जारी साल 2018 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 119 देशों में 103वें स्थान पर दिखता है और रिपोर्ट में भारत के भूख के स्तर को ”गंभीर” की श्रेणी में सूचित किया गया है.

पांच साल से कम उम्र का हर पांच में एक भारतीय बच्चा ”वेस्टिंग” से पीड़ित है, यानी भीषण कुपोषण के चलते उनके कद के अनुपात में उनका वजन बहुत ही कम होता है. इस मामले में भारत से अधिक दर सिर्फ दक्षिण सुडान में दिखती है.

भारत में तेल की कीमतें कैसे निर्धारित होती हैं और वे आसमान क्यों छू रही हैं ?

भारत में पेट्रोल की कीमत अपने पिछले ऊंचे रिकार्ड को भी पार कर गई और 19 सितंबर को मुंबई में वह 88.12 रुपये प्रति लीटर हो गई. उस समय दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80.73 रुपये प्रति लीटर थी और डीजल 72.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था. मुंबई में डीजल की कीमत 77.32 रुपये प्रति लीटर थी.

क्रोनीवाद और भ्रष्टाचार: मोदी मार्का शासन के प्रतीक चिन्ह

मोदी सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा गठित ‘शक्ति-प्रदत्त विशेषज्ञ समिति (ईईसी) की ओर से अभी तक अस्तित्व-हीन जियो इंस्टीट्यूट ऑफ रिलायंस फाउंडेशन को ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (उत्कृष्ट संस्थान - आइओई) का तमगा प्रदान करने का फैसला खुल्लमखुल्ला क्रोनीवाद (पिट्ठू या भाई-भतीजावाद) को रेखांकित करता है जो मोदी मार्का शासन का खास प्रतीक है.

भाजपा कैसे हिंसक भीड़ की सहायता और स्वागत करती है

भारत औपनिवेशिक अवधि में अनेकानेक दंगों और जनसंहारों का गवाह रहा है और इसने उपनिवेशोत्तर काल में भी ढेरों जन-हत्याओं और राज्य के सशस्त्र बलों के द्वारा गैर-न्यायिक एनकाउंटरों को भी देखा है; लेकिन ‘लिंचिंग’ के नाम से जिस किस्म की प्रायोजित भीड़ हिंसा चल रही है, वह तो मोदी राज का एक अनूठा प्रतीक-चिन्ह बन गई है. 30 मई 2015 को राजस्थान के नागौर में अब्दुल गफ्फार कुरैशी की हत्या की पहली घटना के बाद से लिंचिंग पीड़ितों की संख्या 120 को भी पार कर गई है. यह लिंच मॉब परिघटना ‘न्यू इंडिया’ के लिए मोदी शासन का सबसे बड़ा योगदान है.

सामाजिक सुरक्षा कोड पर सरकार द्वारा बुलाई गई बैठकों का केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बहिष्कार किया

ऐक्टू समेत दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (बीएमएस छोड़कर) ने सामाजिक सुरक्षा कोड पर सरकार द्वारा बुलाई गई जोनल स्तर की बैठकों का संयुक्त रूप से बहिष्कार किया. सामाजिक सुरक्षा कोड पर मोदी सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठकों का यह तीसरा दौर है जिसके तहत इसी माह यानी जुलाई में दो जोनों - उत्तरी और पूर्वी - की बैठकें रखी गईं. 27 जुलाई को भुवनेश्वर स्थित मेफेयर होटल जहां पूर्वी जोन की बैठक रखी गई थी, के समक्ष केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने प्रदर्शन कर बैठक का बहिष्कार किया.

नियमितीकरण हेतु उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट बिहार के 8 लाख कर्मियों के साथ ठगी और धोखाधड़ी है

बिहार के सभी अनुबन्ध-मानदेय, प्रोत्साहन राशि व आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण हेतु श्री अशोक चौधरी की अध्यक्षता वाली गठित उच्चस्तरीय समिति द्वारा सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत 8 लाख में से मात्र 3 लाख कर्मियों को ही बिना समान वेतन सम्बन्धी अनुशंसा के नियमितीकरण की रिपोर्ट तैयार कर लेने व शीघ्र ही सरकार को यह रिपोर्ट सौंपने सम्बन्धी अखबारों में प्रकाशित खबर पर ‘बिहार राज्य अनुबन्ध-मानदेय नियोजित सेवाकर्मी संयुक्त मोर्चा’ ने 3 जून ’18 को जारी विज्ञप्ति में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार पर अपनी ही सैद्धांतिक सहमति से पीछे हटने का आरोप लगाया.