Transport

जुगाड़ चालकों का आंदोलन

जुगाड़ गाड़ी व चालक मजदूरों को परमिट देने व विभिन्न थानों में जब्त जुगाड़ गाड़ियों को अविलंब बिना शर्त छोड़ने आदि मांगों को लेकर जुगाड़ गाड़ी चालक संघ (संबद्ध ऐक्टू) के बैनर तले सैकड़ों जुगाड़ चालकों ने 6 फरवरी को भागलपुर कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया. धरना का नेतृत्व ऐक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एस.के. शर्मा, राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त व जुगाड़ गाड़ी चालक संघ के जिला संयोजक रामलखन राम ने किया.

रिक्शा चालकों ने भागलपुर कलेक्ट्रेट पर दिया धरना

रिक्शा चालकों ने रिक्शा-ठेला चालक संघ (संबद्ध ऐक्टू) के बैनर तले भागलपुर, बिहार में 18 फरवरी 2019 को कलेक्ट्रेट पर धरना दिया और ई-रिक्शा अनुदान में देने, सामाजिक सुरक्षा व सम्मान की गारंटी, बेवजह पुलिसिया जुल्म पर रोक और सस्ते भोजन व आवास की व्यवस्था आदि मांगो को बुलंद किया. झंडे-बैनरों व मांग पट्टिकाओं से लैस सैकड़ों रिक्शा चालक मजदूरों ने इस दौरान अपनी मांगों के समर्थन में और सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ घंटो नारे लगा कर अपने हक-अधिकार की आवाज बुलन्द की. धरना का नेतृत्व ऐक्टू के जिला अध्यक्ष सह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एस.के.

मोटर चालकों का आक्रोश मार्च

विगत 7 फरवरी को जयनगर (मधुबनी, बिहार) के मोटर चालक यूनियन नेता मो. नसीम की हुई हत्या में शामिल अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग के साथ 20 फरवरी को हाईवे पर जबरदस्त चक्का जाम कार्यक्रम आयोजित हुआ.

मो. नसीम 2 फरवरी की शाम अपनी गाड़ी से सवारी लेकर जनकपुर (नेपाल) गए थे, 3 फरवरी को पता चला कि उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई है. यह भी पाया गया कि हत्यारों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और नेपाल पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए अपना अभियान चलाए हुए है लेकिन जयनगर पुलिस उसको सहयोग नहीं कर रही है.

मंगलौर के पोर्ट श्रमिकों की हड़ताल के एक साल को याद करते हुये कन्वेंशन का आयोजन

मंगलौर पोर्ट (बंदरगाह) के शिपिंग कंपनी श्रमिकों की एक साल पहले ऐतिहासिक हड़ताल हुई थी जिसको याद करते हुये ऑल इंडिया पोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (एआईपीडब्लूएफ) ने 26 जनवरी 2019 को कन्वेंशन का आयोजन किया.

ऐक्टू और एआईपीडब्लूएफ की अगुवाई में कर्नाटक स्थित मंगलौर पोर्ट के शिपिंग कंपनियों के कर्मियों की पिछले साल 29 जनवरी से 6 फरवरी को पहली बार 9 दिनों की हड़ताल हुई थी. हड़ताल के चलते पोर्ट का समस्त काम बंद हो गया था. केंद्रीय न्यूनतम मजदूरी समेत तमाम वैधानिक सुविधाओं से वंचित इन कर्मियों की मजदूरी और अन्य सेवा शर्तों को व्यवस्थित करने की मांग इस हड़ताल द्वारा उठाई गई थी.

‘‘दिल्ली में प्रदूषण और जन-परिवहन का हाल, हर नागरिक का ज्वलंत सवाल’’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन

दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में 19 जनवरी 2019 को “दिल्ली में प्रदूषण और जन-परिवहन का हाल, हर नागरिक का ज्वलंत सवाल“ विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई.

परिचर्चा में भाग ले रहे प्रमुख विशेषज्ञ वक़्ता प्रोफ़ेसर दुनु रॉय, प्रोफ़ेसर गीतम तिवारी, प्रोफ़ेसर अनिता घई के साथ ही संतोष राय और कंवलप्रीत कौर ने पूरी परिचर्चा में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को ना सिर्फ समझने में मदद की बल्कि इससे निकलने के संघर्ष में आम-जन की बृहत भूमिका को भी चिन्हित किया.

वेतन कटौती समेत अन्य हमलों के खिलाफ डीटीसी के ठेका श्रमिकों का प्रतिवाद

29 अक्टूबर को एक दिन की हड़ताल का ऐलान

न्यूनतम वेतन में कटौती के खिलाफ और समान काम के लिये समान वेतन एवं नियमितीकरण के लिये ऐक्टू से संबद्ध डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर के आहृान पर डीटीसी के ठेका कर्मियों ने 25-28 सितंबर को 40 से ज्यादा डीटीसी डिपो में सुबह 6 से शाम 6 बजे तक स्ट्राइक बैलट में हिस्सा लिया और लगभग 12 हज़ार में से 10 हज़ार से अधिक ठेका कर्मियों यानी 92.2 प्रतिशत ने हड़ताल के पक्ष में डाल कर संघर्ष का बिगुल बजा दिया. बाद में हुई बैठक में 29 अक्टूबर को एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया गया.

‘डीटीसी वर्कर्स युनिटी सेन्टर’ का डीटीसी मुख्यालय पर प्रदर्शन

‘डीटीसी वर्कर्स युनिटी सेन्टर’ (संबद्ध ऐक्टू) ने 21 जून 2018 को डीटीसी (दिल्ली परिवहन निगम) के मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन की तैयारी के क्रम में डीटीसी के दो दर्जन से भी अधिक डिपो में सभाएं की गईं, पर्चा वितरण किया गया एवं पोस्टर लगाये गये. इस प्रदर्शन और 29 अप्रैल को किए गये कन्वेंशन समेत चलाये गये अभियान में डीटीसी को केंद्र में रखते हुए जन परिवहन को मजबूत बनाने और डीटीसी में कार्यरत तमाम ठेका मजदूरों को पक्का करने की मांगें प्रमुखता से उठाई गईं.