Mid Day Meal Workers

Mid Day Meal Workers Making History

The Mid Day Meal scheme was initiated in Jharkhand in 2004-05. The Village Education Committees were entrusted with the responsibility of employing cooks for the scheme. In the initial phase, mere 25-30 paisas were fixed as honorarium for every meal cooked for a student. If meals for 100 school kids were cooked, the total honorarium to be paid was 25 rupees.

Scheme Workers and Their Struggles

Almost one crore scheme workers all over the country shoulder the burden of implementing several important public schemes of the central government on health and education. They include ASHA workers (working under National Rural Health Mission program), Anganvadi workers (working under ICDS program) and MDM workers (working under Mid Day Meal scheme for school children). Almost 95% of the scheme workers in the country are women. These scheme workers are the backbone in ensuring basic health and nutrition to vast majority of the country’s population.

The Forgotten Frontline Workers: Safai Karamcharis, Hospital D-Group Workers, ASHA Workers and Crematorium Workers

While everyone is speaking about the doctors and nurses, who are most definitely working on the frontlines and whose services are, of course, laudable during this pandemic, it is necessary for us to remember the frontline workers who are often neglected – the Safai Karamcharis / Sanitation Workers, the D-Group workers in hospitals, ASHA Workers and Crematorium workers.

मिड-डे मील रसोइयों पर हाईकोर्ट ने कहा  न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन बंधुआ मजदूरी जैसा

स्कूलों में बच्चों को पोषण आहार मिड-डे मील उपलब्ध कराने वाले रसोइयों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है. हाई कोर्ट ने परिषदीय स्कूलों में काम करने वाले इन रसोइयों को अब न्यूनतम मजदूरी से अधिक वेतन का भुगतान करने का महत्वपूर्ण फैसला दिया है. कोर्ट ने प्रदेश में सभी रसोइयों को न्यूनतम वेतन भुगतान का निर्देश दिया है. इस आदेश से रसोइयों के वेतन में बढ़ोत्तरी हो सकेगी.

झारखंड में रसोईयों का ‘‘वादा निभाओ’’ घरना 

28 दिसंबर को ऐक्टू से संबद्ध ‘‘झारखंड राज्य विद्यालय रसोईया संघ’’ के बैनर तले डाल्टेनगंज शहर में रसोइयों (मिड-डे मील कर्मियों) ने मार्च करते हुए जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय ‘‘वादा निभाओ’’ धरना कार्यक्रम आयोजित किया. 

ऐक्टू के नेतृत्व में प. बंगाल में मिड-डे मील कर्मियों का संघर्ष

ऐक्टू से संबद्ध ‘पश्चिमबंगा संग्रामी रंधन कर्मी यूनियन’ के नेतृत्व में राज्य में 13 अक्टूबर को मिड-डे मील कर्मियों के राज्यव्यापी प्रदर्शन आयोजित हुए जिनमें मजदूरी में बढ़ोतरी और त्योहार भत्ते की मांग उठाई गई. पिछले आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मिड-डे मील सेवा को मनरेगा के साथ जोड़ते हुए मजदूरी में बढ़ोतरी का आश्वासन दिया था, लेकिन यह अभी तक पूरा नहीं हुआ है. 

संग्रामी रंधन कर्मी यूनियन (एमडीएम) का दूसरा राज्य सम्मेलन

पश्चिम बंग संग्रामी रंधन कर्मी (मिड-डे मील यूनियन, संबद्ध ऐक्टू) का दूसरा राज्य सम्मेलन हावड़ा में 29 दिसंबर को संपन्न हुआ. झंडोत्तोलन ऐक्टू उपाध्यक्ष मीना पाल ने किया. शहीद वेदी पर माल्यार्पण एवं शोक श्रद्धांजलि के बाद सम्मेलन शुरू हुआ. सम्मेलन का उद्घाटन ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय संयोजक सरोज चौबे ने किया. उन्होंने रसोइयों से केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत 8 जनवरी की आम हड़ताल में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी लेने की अपील की.

सम्मेलन को ऐक्टू राज्य सचिव बासुदेव बोस और ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव इंद्रानी दत्ता ने संबोधित किया. 

सुगौली विस्फोट कांड : कौन है ज़िम्मेदार? बेख़बर है सरकार!

16 नवंबर को पूर्वी चंपारण स्थित सुगौली में 'मिड डे मील' योजना के तहत भोजन आपूर्ति करने वाले एनजीओ ‘नव प्रयास’ के किचेन में खाना बनाने वाले बॉयलर में हुए भीषण विस्फोट कांड ने राज्य की नीतीश–भाजपा सरकार की लचर व्यवस्था को फिर से उजागर कर दिया।

साभार न्यूज क्लिक

 

झारखंड में मिड-डे मील कर्मियों का धरना

ऐक्टू से सम्बद्ध ‘‘झारखंड राज्य विद्यालय रसोईया संघ’’ ने सरकारी विद्यालय के रसोइया कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और तत्काल मासिक 18,000 रू. मानदेय भुगतान सहित 10-सूत्री मांगो को लेकर 19 सितम्बर 2019 रांची स्थित राजभवन के समक्ष धरना दिया. हाथों में झंडें, तख्तियां और बुलंद नारों के साथ देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, धनबाद, पलामू, गढ़वा, रांची, रामगढ़, कोडरमा समेत राज्य भर से बड़ी संख्या में रसोइया कर्मी धरना कार्यक्रम में शामिल हुए.